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Friday, July 12, 2019

दान करना भी पाप होय गेले | अंगिका कहानी | डॉ. (श्रीमती) वाञ्छा भट्ट शास्त्री | Angika Story | Dr. (Smt.) Vanchha Bhatta Shastri

दान करना भी पाप होय गेले | अंगिका कहानी  | डॉ. (श्रीमती) वाञ्छा भट्ट शास्त्री
| Angika Story  | Dr. (Smt.) Vanchha Bhatta Shastri 


हमेशा हम्में द्वारी पर आलऽ या रास्ता में भीख मांगे वाला के कुच्छु पैसा दै दै छेलिये । लेकिन, हमरऽ देलऽ दान केकरो के लेलऽ बोड़ऽ मुसीबत केरऽ कारण भी बनी सके छै । एन्हऽ ही एक घटना हमरा हि लाय के रखी देलके । हमरा घऽर झाडू - पोछा करे वाली नौड़ी केरऽ आदमी (पति) दरूहा छै । काम वाली अपनेऽ बड़की बेटी के अपनऽ कमाई से उच्चऽ शिक्षा दिलाबे केरऽ किरिया (कसम) खैलऽ छेले, ओकरऽ बेटी अच्छा इसकूलऽ (स्कूल) में पढ़ी रहलऽ छेले । ओकरऽ छोटकी बेटी जे मात्र चार साल केरऽ छेले, ओकरा अपनऽ आदमी (पति) केरऽ भरोसा छोड़ी के काम करे ले चलऽ आबे छेले । एक दिन काम वाली नौड़ी हमरा बतैलके, हमरऽ कमाई से घर खरचा आरो बेटी केरऽ पढ़ाई चली रहलऽ छै । लेकिन समझ में नांय आबै छै कि हमरऽ आदमी (पति) के पैसा कोन दै छै जे रोज दारू पी के घऽर आबे छै । सत्यानाश होवे ओकरऽ जे ओकरा दारू पी केरऽ पैसा दे छै । वे कत्ते सरापलकी आरो बड़बड़ाते रहली । हमरऽ आदत छेले, जबे हम्में बाजार जाय छेलिये तरकारी भाजी किने ले, एकरा छोटऽ सन बच्ची फटलऽ- पुरानऽ कपड़ा में देखाबे छेला ओकरा कभी दस कभी पांच टाका दान में दै दे छेलिये । एक दिन काम वाली नौड़ी अपनऽ छोटकी बेटी के साथ लै के आली, बढि़याँ कपड़ा पेन्हलऽ, ओकर पति कहीं बाहर गेलऽ छेले, अकेले कहाँ छोड़तिये । ओकरऽ बेटी के देखी के चौंकी गेलिये । ई ते वेहे बच्ची छिके, जेकरा हम्में कभी कभार दस पांच टाका दै दै छेलिये । हमरे सरिखे आरो लोग भी पैसा दै छेले, तब भी वू फटलऽ पुरानऽ कपड़ा में रहे छेले । अपनऽ माय के साथ साफ- सुथरा कपड़ा में आल छेली । हम्में ओकरा से पुछलिये हम्में जै पैसा दै छेलियो, वू पैसा तोहे केकरा दै छें ? बच्ची जबाब देलके वू सब पैसा बाबू (बाप) के दै छेलिये । आरो बाबू कहे छेला केकरो बतैई हें नांय ? नांय ते मारी के फेंकी देबो । डर के मारे हम्में माय के भी नांय बताबे छेलिये । अपना साथ फटलऽ - पुरानऽ कपड़ा पिंहाय के लै जाय छेले । अपने कहीं छुपी के देखते रहे छेले, कौन केतना दै रहलऽ छै । माय ई सब सुनी के फफकी- फफकी के कान्दे लागली, हम्में मरी मरी के काम करे छी घर खरचा चलाबे छी, अबे तोरा सनी ही निर्णय करऽ ई दान केन्हऽ फल दिलैते ।


टुटलौ कटोरी | अंगिका कहानी संग्रह | डॉ. (श्रीमती) वाञ्छा भट्ट शास्त्री
Tutlow Katori | Angika Story Collection | Dr. (Smt.) Vanchha Bhatta Shastri 

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